चांपाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
राम कृष्ण (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 33.8% वोट पाकर चांपा सीट जीती और इंद्रजीत सिंह (निर्दलीय) को 1,767 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 14 सबलगढ़ है।
विजेता
11.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राम कृष्ण | 5,22833.8% | |
| 2 | इंद्रजीत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3,46122.4% |
| 3 | जीवन साव | 2,90718.8% | |
| 4 | सिलिकराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0636.9% |
| 5 | एच. एस. थियोडोर निर्दलीय | निर्दलीय | 9946.4% |
| 6 | राजधर निर्दलीय | निर्दलीय | 7064.6% |
| 7 | आनंदीलाल पाण्डेय SP | SP | 6364.1% |
| 8 | श्योदयाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4683.0% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 75% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.69 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।