मध्य भारत का इकलौता चुनाव

मध्य भारत विधान सभा का नक्शा लोड हो रहा है…

चुनाव की कहानी

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने मध्य भारत के इकलौते विधान सभा चुनाव में एकतरफ़ा जीत दर्ज की।

इसने 99 में से 75 सीटें जीतीं, काफ़ी गुंजाइश के साथ।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय हिन्दू महासभा 11 सीटों के साथ बहुत पीछे रही।

3 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलीं।

क्या बदला

यह राज्य में हुआ इकलौता विधान सभा चुनाव था।

इसके कुछ निर्वाचन क्षेत्र बहु-सदस्यीय थे, जहाँ एक ही चुनावी मुक़ाबले से एक से ज़्यादा प्रतिनिधि नई विधान सभा में पहुँच सकते थे।

79 निर्वाचन क्षेत्रों में से 20 इसी तरह के थे।

कुल मिलाकर मध्य भारत की विधान सभा 99 सदस्यों की हो गई।

अहम आँकड़े

चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला गुना, मध्य भारत में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 14 वोटों से हुआ।

सबसे बड़ी जीत जावरा, मध्य भारत में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 58.8% आगे रहा।

पूरे राज्य में लगभग 36.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला पिछोर भांडेर, मध्य भारत में हुआ, जहाँ एक ही सीट के लिए 18 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

यह राज्य ख़ुद कम समय तक रहा; यह मध्य भारत की रियासतों को मिलाकर बना था, और ग्वालियर व इंदौर इसकी संयुक्त राजधानियाँ थीं।