वृद्धाचलमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1957
एम. सेल्वाराज (निर्दलीय) ने 1957 के विधान सभा चुनाव में 29.1% वोट पाकर वृद्धाचलम सीट जीती और जी. राजवेलु पद्याचरी (INC) को 839 वोटों से हराया।
1957 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1951 में सीट नंबर 64 गुंटूर थी। 1957 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 से सीट नंबर 64 अरूर है।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। एम. सेल्वाराज 2.2% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | एम. सेल्वाराज निर्दलीय | निर्दलीय | 11,18929.1% |
| 2 | जी. राजवेलु पद्याचरी | 10,35026.9% | |
| 3 | अय्यासामी कौंडन | 5,34313.9% | |
| 4 | परमशिवम निर्दलीय | निर्दलीय | 4,33111.3% |
| 5 | पी.एन. सरगुरु निर्दलीय | निर्दलीय | 3,3338.7% |
| 6 | वीरासामी पडयाची निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3846.2% |
| 7 | पी. कलियपेरुमल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5103.9% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 70% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.95 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1967 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1967 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।