हैदराबाद का इकलौता चुनाव
क्या हुआ
हैदराबाद राज्य के इकलौते आम चुनाव में एक पार्टी को सरकार चलाने लायक़ साफ़ बहुमत मिला, और बाक़ी में से एक हिस्सा निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 175 सीटों में से 93 सीटें जीतीं।
इससे उसे बहुमत से 5 सीटें ज़्यादा मिलीं।
निर्दलीय उम्मीदवारों ने 14 सीटें जीतीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 42 सीटें जीतीं।
क्या बदला
हैदराबाद की विधान सभा सिर्फ़ इसी एक बार चुनी गई — उसका पूरा चुनावी इतिहास इसी एक चुनाव से शुरू होकर इसी पर ख़त्म होता है।
इसकी कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, यानी एक ही मुक़ाबले से एक से ज़्यादा सदस्य विधान सभा में पहुँचते थे।
142 निर्वाचन क्षेत्रों में से 33 इसी तरह काम करते थे।
अहम आँकड़े
हैदराबाद के इकलौते चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला कुष्टगी, हैदराबाद में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 89 वोटों से हुआ — उस चुनाव में किसी भी सीट का सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा)।
दूसरी ओर, शाहपुर, हैदराबाद में जीत कुल वोटों के 77.0% के अंतर से हुई — किसी भी सीट का सबसे बड़ा जीत का अंतर, जिसे वोटों की गिनती में नहीं बल्कि कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
राज्य भर में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) लगभग 43.5% रहा; सबसे ज़्यादा वेमसूर, हैदराबाद में, 69.7%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला हिंगोली, हैदराबाद में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 9 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
दूसरे स्थान पर रही पार्टी असल में कोई स्वतंत्र पार्टी नहीं थी — वह एक ऐसी पार्टी का मुखौटा थी जिस पर सीधे चुनाव लड़ने की रोक थी।