भोपाल का इकलौता चुनाव

भोपाल विधान सभा का नक्शा लोड हो रहा है…

चुनाव की कहानी

क्या हुआ

भोपाल की कम समय तक चली विधान सभा का एक ही चुनाव हुआ, और वह भी एकतरफ़ा।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 30 सीटों में से 25 सीटें जीतीं।

वह भारी जीत थी — बहुमत के आँकड़े से 9 सीटें आगे।

उसके इससे कम, 52.0% था।

क्या बदला

भोपाल की विधान सभा का दोबारा मुक़ाबला कभी नहीं हुआ — यह राज्य ही इतने समय तक नहीं टिका कि फिर से वोट पड़ते।

उस पुनर्गठन के तहत भोपाल की विधान सभा मध्य प्रदेश की अपनी विधान सभा में मिला दी गई।

कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, यानी हर मुक़ाबले से विधान सभा के लिए एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।

23 निर्वाचन क्षेत्रों में से 7 इसी तरह काम करते थे।

अहम आँकड़े

भोपाल के इकलौते चुनाव के कुछ आँकड़े ख़ास ध्यान खींचते हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला अमरावद, भोपाल में हुआ, जहाँ फ़ैसला सिर्फ़ 26 वोटों से हुआ — इस चुनाव में किसी भी सीट पर जीत का सबसे कम अंतर।

दूसरे छोर पर, उदयपुर, भोपाल में 64.6% वोट रहा — उस चुनाव में किसी भी सीट पर जीत का सबसे बड़ा अंतर, जिसे वोटों की संख्या में नहीं बल्कि वोटों के हिस्से में मापा गया।

इस चुनाव का सबसे भरा हुआ बैलट सिलवानी, भोपाल में था, जहाँ 8 उम्मीदवार मैदान में थे।

पूरे राज्य में सिर्फ़ 38.7% रहा।

पृष्ठभूमि

बाक़ी वोट निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटे दलों को मिले।

इनमें सबसे बड़े निर्दलीय उम्मीदवार रहे, जिन्हें 4 सीटें और 22.9% वोट मिले।