बर्दवान-दुर्गापुरलोक सभा चुनाव का परिणाम, 2014
डॉ. ममताज संघमिता (AITC) ने 2014 के लोक सभा चुनाव में 41.6% वोट पाकर बर्दवान-दुर्गापुर सीट जीती और सेख सैदुल हक (CPM) को 1,07,331 वोटों से हराया।
विजेता
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार + नोटा| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. ममताज संघमिता | 5,54,52141.6% | |
| 2 | सेख सैदुल हक वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 4,47,19033.6% |
| 3 | देबश्री चौधुरी NDA | NDA | 2,37,20517.8% |
| 4 | अगस्त्य प्रदीप UPA | UPA | 44,3553.3% |
| — | नोटा नोटा | नोटा | 16,8861.3% |
| 5 | मो. हारून | 11,8620.9% | |
| 6 | सुनील कुमार पुरकैत | 7,5740.6% | |
| 7 | डॉ. धनपति दास BMUP | BMUP | 6,6650.5% |
| 8 | शारदा मणि सामंत निर्दलीय | निर्दलीय | 4,9840.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
नोटा को कितने वोट मिले?
वोट नोटा (“इनमें से कोई नहीं”) को मिले
यह सीट कितनी बार सरकार बनाने वाली पार्टी को मिली?
वोट किस तरह बँटे?
बर्धमान ज़िला · 77.2 लाख लोग · जनगणना 2011
बंगाल डोकरा, बर्धमान सीताभोग - मिहिदाना तथा अग्निरोधी ईंटें और ऐसे ही अग्निरोधी सिरेमिक आदि के लिए प्रसिद्ध।
यह ज़िलाटूटी रेखा = भारत
यहाँ कौन रहता है?
यहाँ कौन-कौन से धर्म माने जाते हैं?
- हिंदू77.8%
- मुस्लिम20.7%
- ईसाई0.3%
- सिख0.2%
- बौद्ध<0.1%
- जैन<0.1%
- अन्य धर्म (आदिवासी आस्थाओं समेत)0.6%
- नहीं बताया0.3%
नल में पानी, बिजली और शौचालय वाले घर
सेहत और परिवार
आसपास के प्रसिद्ध स्थान
35 प्रसिद्ध स्थानप्रसिद्ध स्थानों के आँकड़े: Wikidata (CC0) · ASI (भारत सरकार, आधिकारिक)। तस्वीरें: Wikimedia Commons (हर फ़ाइल का अपना CC / पब्लिक-डोमेन लाइसेंस, हर फ़ाइल देखें)। नक्शे का डेटा © OpenStreetMap contributors.
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
यहाँ से कौन जीता, 1977–2014
AITC ने यह सीट CPM से छीन ली, जिसने इसे 2009 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह AITC की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत लगभग 2009 जितना ही रहा: 84.1%।
- 1977राज कृष्ण दाँ (JNP), जीत का अंतर 20.0%
- 1980सुशील कुमार भट्टाचार्य (CPM), जीत का अंतर 22.0%
- 1984सुधीर राय (CPM), जीत का अंतर 8.4%
- 1989सुधीर राय (CPM), जीत का अंतर 23.3%
- 1991सुधीर राय (CPM), जीत का अंतर 26.4%
- 1996बलाई राय (CPM), जीत का अंतर 27.2%
- 1998सर निखिलानंद (CPM), जीत का अंतर 27.7%
- 1999सर निखिलानंद (CPM), जीत का अंतर 31.1%
- 2004निखिलानंद सर (CPM), जीत का अंतर 47.3%
- 2009सेख सैदुल हक (CPM), जीत का अंतर 9.5%
- 2014डॉ. ममताज संघमिता (AITC), जीत का अंतर 8.1%






