ककिनाडालोक सभा चुनाव का परिणाम, 1984
थोटा गोपाला कृष्ण (TDP) ने 1984 के लोक सभा चुनाव में 60.4% वोट पाकर ककिनाडा सीट जीती और संजीव राव एम.एस. (INC) को 1,29,714 वोटों से हराया।
विजेता
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | थोटा गोपाला कृष्ण | 3,44,03860.4% | |
| 2 | संजीव राव एम.एस. | 2,14,32437.6% | |
| 3 | वाड्रेवु वेंकट सूर्य नंदा राव निर्दलीय | निर्दलीय | 4,3640.8% |
| 4 | शमूएल वेमवरपु निर्दलीय | निर्दलीय | 3,4390.6% |
| 5 | सरगनम कोंडला स्वामी नायुडु निर्दलीय | निर्दलीय | 2,4990.4% |
| 6 | गुर्रम कामेश्वर राव निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0860.2% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
TDP और INC को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.98 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
यह सीट कितनी बार सरकार बनाने वाली पार्टी को मिली?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
यहाँ से कौन जीता, 1962–1984
TDP ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1962 से शुरू होता है, यह TDP की पहली जीत थी। यह 1967 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1980 के 54.1% से बढ़कर 72.2% हो गया।